Cheque Bounce क्या है? चेक बाउंस होने पर क्या करना चाहिए? बेस्ट जानकारी

Cheque bounce क्या है?





हेलो नमस्कार मित्रों तो आज किस पोस्ट के अंदर हम आपको बताने वाले हैं। कि चेक बाउंस क्या होता है।और इसे हो जाने पर आपको क्या करना चाहिए। सब कुछ आज की इस पोस्ट में कवर करने वाले दोस्तों अगर आपके साथ भी यह प्रस्तुति हो गई है और आपको यह सुझाव नहीं आ रहा है कि आपको ऐसे समय में क्या करना चाहिए तो आज यह पोस्ट स्पेशल आपके लिए है। क्योंकि इस पोस्ट के जरिए हम आपको चेक बाउंस के बारे में संपूर्ण जानकारी बिल्कुल बारीकी से देने वाले हैं। और अगर आप लोग चेक बाउंस के बारे में संपूर्ण जानकारी को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं।तो इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें। तो आइए शुरू करते हैं।

Cheque bounce क्या होता है?

आपकी जानकारी के लिए हम आपको यहां पर बता दें कि चेक को जारी करने के बाद जब चेक को प्राप्त करने वाला व्यक्ति उसे बैंक में जमा कर देता है। और उस चेक को बैंक के द्वारा किसी कारण से स्वीकार नहीं करते बल्कि उसे बैंक की अपेक्षा उसे बैंक द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है। तो साथियों यह सारी प्रक्रिया चेक बाउंस कहलाती है। साथियों शायद ही आप यह बात जानते हो मगर चेक बाउंस होने के बहुत से कारण एवं वजह होती है। जिनके बारे में हम आपको आगे चलकर बताने वाले हैं। अगर आप लोग भी चेक बाउंस होने के कारणों के बारे में जानना चाहते हैं। तो पोस्ट में आगे तक बनी रहे।

जानिए चेक बाउंस क्यों हो जाता है?

जैसा कि दोस्तों हमने आपको अभी अभी ऊपर ही बताया है।कि चेक बाउंस होने के बहुत से कारण होते हैं। जिनकी वजह से चेक बाउंस हो जाता है। तो अब चलिए उनके बारे में विस्तार पूर्वक जान लेते हैं।

• चेक को बैंक में जमा करते समय अगर जारीकर्ता के बैंक अकाउंट में उपलब्ध पैसे नहीं होते हैं. जितने पैसे चेक में दर्ज किए गए तो इस वजह से भी चेक बाउंस कर दिया जाता है।

• चाहे कोई भी चेक जारीकर्ता हो अगर उसके हस्ताक्षर उसके बैंक अकाउंट से मैच नहीं खाते हैं। तो इस कारण से भी चेक बाउंस हो जाता है।

• जब आप चेक को भरते हो अगर उसमें कोई गलती हो जाए या फिर आप उसमें काट पीट कर देते हो जाने की सफाई नहीं रहती है। तो ऐसे भी चेक बाउंस कर देते हैं।

• तो दोस्तों किसी प्रकार से अगर चेक के अंदर किसी प्रकार की कोई गलती या फिर कोई कमी रह जाती है। तो बैंक के द्वारा उसे अस्वीकार कर दिया जाता है।

तो दोस्तों अब तक आपने यह बहुत अच्छे तरीके से जान लिया हुआ कि चेक बाउंस किन वजहों से होता है। तो अब हम आपको यह बताने जा रहे हैं। अगर हमें कोई व्यक्ति चेक देता है। और किसी कारण से वह चेक बाउंस हो जाता है। तो ऐसे में हम उस चेक जारी करता के विरुद्ध कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई कर पाएंगे। आइए उनके बारे में जान लेते हैं।

Cheque bounce हो जाने पर क्या करना चाहिए?

दोस्तों जब बैंक द्वारा आपके किसी चेक को रिजेक्ट या फिर अस्वीकार कर दिया जाता है। तो बैंक द्वारा आपको एक रिसिप्ट मिलती है। और दोस्तों उसे रिसिप्ट के अंदर यह साफ-साफ बताया जाता है। कि आपका चेक किस वजह से बाउंस किया गया है।तो ऐसे में आपको उस पर्ची को अपने पास में रखना होगा जो आपका भी अभी चेक था वह बाउंस हो गया है। तो आप उस व्यक्ति के प्रति कानूनी कार्यवाही कर पाओगे जिस व्यक्ति ने आपको वह चेक सौंपा था तू ऐसे में सबसे पहले आपको एक वकील के पास जाना होता है। और उस वकील को आपको पूरा मामला बताना पड़ता है। इसके पश्चात वह उस व्यक्ति के प्रति एक लीगल नोटिस जारी कर देता है।

फिर वह उस नोटिस को चेक जारी करता के पास में पहुंचा देता है।और फिर उसके अंदर यह जानकारी दी जाती है। कि आपने जो चेक दिया था वह बैंक के द्वारा बाउंस कर दिया गया है। इसी वजह से आप लोग पीड़ित व्यक्ति का मात्र 15 दिनों के अंदर ही पेमेंट कर दें नहीं तो हम आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे और इसी के साथ न्यायालय में केस दर्ज कर देंगे दोस्तों से नोटिस को भेजने के बाद चेक जारीकर्ता आपका पेमेंट कर देता है। यह आपने नोटिस भेज दिया है। और 15 दिनों के बाद भी उसने आपको पेमेंट नहीं दिया है। और ना ही नोट इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है। तो ऐसे में आप लोग वकील की मदद से न्यायालय में केस दर्ज कर सकते हो और उसके अंदर आपको अपनी सारी परेशानियां बतानी होगी।

अगर आप लोग चाहो तो न्यायालय में इस बात की भी मांग कर पाओगे केस के शुरू में मुझे केस का 20 से 30% अमाउंट तुरंत में चाहिए तो साथियों ऐसे में न्यायालय आपको चेक का 20% से 30% राशि आपको पहले ही दिलवा देता है। तो उसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाती है। और चेक बाउंस होने के जो वास्तविक तरीके होते हैं। उनका पता लगाया जाता है। और अंत में जब इस बात का फैसला हो जाता है। कि चेक बाउंस चेक जारीकर्ता की गलती के कारण हुआ है।तो ऐसा होने पर न्यायालय आपको चेक जारीकर्ता से सारा अमाउंट दिलवा देता है। इसमें सबसे अच्छी बात यह होती है। आपको जो 20% से 30% न्यायालय पहले ही राशि डलवा देता है। वह भी आपके पास ही मौजूद रहती है।

दोस्तों ऐसे में अगर आप लोग केस हार जाते हो तो आपको चेक राशि पूरी देनी पड़ेगी और जो राशि न्यायालय आपको दिलाता है। वह भी आपको वापस देने पड़ती है। ऐसे समय में आपको घबराने की कोई भी जरूरत नहीं है।क्योंकि ऐसे हालात में पीड़ित व्यक्ति ऐसे केस को जीत जाता है। और जो व्यक्ति चेक जारी करता है।उसे हार का मुंह देखना पड़ता है।और अंत में उसे वह सारे पैसे देनी पड़ती है।जो उसने चेक के द्वारा देने की कोशिश की थी और एक महत्वपूर्ण बातें यहां पर यह आती है।कि चेक बाउंस हो जाने की 30 दिनों के अंदर ही आपको केस दर्ज करना पड़ेगा 30 दिन खत्म हो जाने के बाद आप उस चेक जारीकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएंगे।

चेक बाउंस होने पर किन हालातों में कानूनी कार्रवाई नहीं होती?

दोस्तों आपको यह बात जानकर बिल्कुल हैरानी होगी कि कुछ ऐसी परिस्थितियां या फिर कुछ ऐसे हालात भी होते हैं। कि चेक बाउंस हो जाने पर भी आप चेक जारी करता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते हो जैसे उदाहरण के तौर पर हम आपको बताएं अगर कोई चेक है।और वह आपको डोनेशन के जरिए मिला है। तो ऐसी परिस्थिति में आप लोग चेक जारीकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं कर पाओगे या फिर आपको कोई चेक गिफ्ट के तौर पर मिलता है।तो भी आप कानूनी कार्रवाई चेक जारीकर्ता के खिलाफ नहीं कर सकते हो।

आज आपने क्या सीखा?

साथियों आज किस पोस्ट के माध्यम से आपको यह सीखने के लिए मिला है। कि चेक बाउंस क्या होता है? और चेक बाउंस हो जाने पर आपको क्या करना चाहिए। सब कुछ अपने आप को बिल्कुल हिंदी में आज किस पोस्ट के अंदर डिटेल्स में समझाया है। तो हम आशा करते हैं कि आपको हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी बहुत ही ज्यादा पसंद आई होगी और इससे आपको लाभ होगा आप चाहो तो इस जानकारी को अपने सभी दोस्तों के पास भी शेयर कर सकते हो।

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